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अनुसन्धान क्या है | अनुसन्धान का अर्थ | Anusandhan in Hindi | अनुसन्धान के प्रकार

अनुसन्धान या शोध क्या है

अनुसन्धान कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं है, जो केवल धरातल पर ही खोजबीन करे। इसमें गहन निरीक्षण मुख्य प्रत्यय है। दूसरा मुख्य विचार समस्या का विशिष्टीकरण है। इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि अनुसंधान एक सीमित क्षेत्र में किसी समस्या का सर्वांगीण विश्लेषण है। अनुसन्धान को अंग्रेजी में रिसर्च (RESEARCH) कहा जाता है। रिसर्च में 'रि' (RE) शब्दांश आवृत्ति और गहनता का द्योतक है जबकि 'सर्च' (SEARCH) शब्दांश खोज का समानार्थी है।

इस प्रकार 'रिसर्च' का अर्थ हुआ प्रदत्तों की आवृत्यात्मक और गहन खोज करना। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो प्रदत्तों की तह में बैठकर कछ निष्कर्ष निकालना, नये सिद्धान्तों की खोज करना और उन प्रदत्तों का स्पष्टीकरण करना 'रिसर्च' की प्रक्रिया के अन्तर्गत आता है।

रिसर्च के प्रकार

अनुसन्धान के प्रकार

किसी भी समस्या के समाधान अथवा किसी भी प्रश्न का उत्तर जानने के दो मुख्य कारण होते हैं- (1) बौद्धिक तथा (2) व्यावहारिक

बौद्धिक कारण का सम्बन्ध मनुष्य की जिज्ञासा की प्रवृत्ति तथा ज्ञानार्जन से प्राप्त सन्तुष्टि की भावना से है। जबकि व्यावाहारिक कारण का सम्बन्ध मनुष्य की उस इच्छा से है, जिसके द्वारा वह ज्ञान प्राप्त करके अन्य कार्यों को अधिक कुशलतापूर्वक कर सके।

उपर्युक्त दोनों कारणों के आधार पर समस्त अनुसन्धानों को दो वर्गों में विभक्त किया जाता है-

1. मूलभूत अनुसन्धान तथा

2. व्यवहृत अनुसन्धान।

1. मूलभूत अनुसन्धान- ऐसे अनुसन्धान, जिनके निष्कर्षों द्वारा किन्हीं विशेष वैज्ञानिक नियमों का प्रतिपादन हो, वे सभी इस वर्ग में आते हैं। एण्ड्रीआस के अनुसार, “मूलभूत अनुसन्धान का मुख्य उद्देश्य नयी प्ररचनाओं का निर्माण करना है।"

मूलभूत अनुसन्धान में अनुसन्धानकर्ता प्राकृतिक घटनाओं को अपने अध्ययन के निष्कर्षों से सम्बन्धित करता है। इस प्रकार के अनुसन्धान का मुख्य कारण तथ्यों का एकत्रीकरण है। अनुसन्धानकर्ता इन तथ्यों को उपयोगिता आदि की दृष्टि से एकत्रित नहीं करता। वह केवल इन तथ्यों को इसलिए एकत्रित करता है क्योंकि तथ्य एकत्रित करने योग्य हैं। मूलभूत अनुसन्धान, इस प्रकार, हमारे ज्ञान में वृद्धि करता है।

2. व्यवहृत अनुसन्धान- इस वर्ग में वे अनुसन्धान आते हैं, जिनके द्वारा किसी समस्या विशेष का समाधान आवश्यक हो। व्यवहृत अनुसन्धान में विज्ञान के कुछ विशेष नियमों का किसी विशेष मामले पर प्रभाव जाना जाता है। एण्ड्रीआस के अनुसार, तथ्यों द्वारा यदि अनुसन्धानकर्ता किसी क्रियात्मक समस्या का समाधान करे तो यह अनुसन्धान व्यवहृत अनुसन्धान की श्रेणी में आता है।

अनुसन्धानों को यद्यपि इस प्रकार वर्गीकृत करते हैं, फिर भी ऐसे वर्गीकरण पूर्णरूप से सम्भव नहीं हैं, क्योंकि मूलभूत तथा व्यवहृत अनुसन्धान को अलग करना एक कठिन कार्य है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक विज्ञानों में क्रियात्मक समस्याओं पर किये गये अनुसन्धान नये सिद्धान्तों तथा नियमों को बनाने में सहायक होते हैं। इसी प्रकार मूलभूत अनुसन्धानों से कुछ ऐसी जानकारी प्राप्त होती है, जिनका व्यवहृत अथवा क्रियात्मक उपयोग होता है। अनुसन्धान को इस प्रकार वर्गीकृत करने के बाद भी दोनों प्रकार के अनुसन्धानों की अनुसन्धान पद्धति में काफी मात्रा में समानता होती है। वैज्ञानिक अनुसन्धान तथा शोधों के लिए सामान्य नियमों को निश्चित करना तथा किसी विशेष परिस्थिति में व्यवहृत अथवा क्रियात्मक समस्या से इन नियमों को सम्बन्धित करना आवश्यक है।

नेशनल साइंस फाउण्डेशन ने अनुसन्धान का वर्गीकरण निम्नलिखित ढंग से किया है-

(1) मूलभूत अनुसन्धान

(2) व्यवहत अनुसन्धान

(3) प्रयोगात्मक अनुसन्धान

वास्तव में अनुसन्धान मूल रूप में तथ्यों का नवीन ढंग से विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसके द्वारा वर्तमान ज्ञान कोष में वृद्धि होती है। अत: अनुसन्धानकर्ता का बल नयी व्याख्या एवं विश्लेषण की ओर रहता है। इन सामाजिक अनुसन्धानों के मूल्यांकन में व्यक्तिगत प्रभाव पूर्ण रूप से दूर नहीं किया जा सकता, फिर भी उसमें वस्तुनिष्ठता लाने का प्रयास करना ही होगा। इस दृष्टि से इसके वर्गीकरण पर भी विचार करना संगत रहेगा। अनुसन्धान एक विकासोन्मुख प्रत्यय है, इसकी प्रकृति गत्यात्मक है, आधार वैज्ञानिक है, विकास अभिसंचयी है तथा ज्ञान एवं विद्वता का दिग्दर्शक है।

इन बातों को ध्यान में रखते हुए एडवर्ड तथा कॉनबैक का वर्गीकरण तर्कसंगत प्रतीत होता है, जो निम्न प्रकार है-

1. सर्वेक्षण अनुसन्धान

2. प्रविधि अनुसन्धान

3. व्यवहृत अनुसन्धान

4. आलोचनात्मक अनुसन्धान

1. सर्वेक्षण अनुसन्धान- इस प्रकार के अनुसन्धान का सम्बन्ध उन सामान्य समस्याओं से है, जिनके अन्तर्गत यह निश्चित करते हैं कि कौन-सा चर अन्य किस चर से, किस रूप में, किस सीमा तक सम्बद्ध है। इस प्रकार चरों की स्थिति एवं उनके सम्बन्धों की स्थिति का सर्वेक्षण ही इसका मूल उद्देश्य होता है। सर्वेक्षण अनुसन्धान की प्रकृति सम-गवेषणात्मक होने के कारण किसी समस्या पर अनुसन्धान के प्राथमिक स्तर पर यह बहुत ही उपयोगी है।

2. प्रविधि अनुसन्धान- इस प्रकार के अनुसन्धान का सम्बन्ध निरीक्षण की विधियों सम्बन्धी समस्याओं के समाधान से है। जब किसी चर के निरीक्षण की अनेक विधियाँ उपलब्ध हों, तो प्रविधि अनुसन्धान इन विधियों का तुलनात्मक अध्ययन कर उनकी प्रभाविता का स्पष्टीकरण करता है।

3. व्यवहृत अनुसन्धान- इस प्रकार के अनुसन्धान के अन्तर्गत व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं। मान लीजिए, हमारा उद्देश्य एक वांछित दिशा में लोगों की अभिवृत्तियों के परिवर्तन की अनेक विधियों में से सर्वोत्तम विधि का चुनाव करना है, तो इस प्रकार का अनुसन्धान उसमें सहायक होगा। ऐसे अवसर पर व्यवहृत अनुसन्धान के आधार पर प्राप्त निष्कर्षों द्वारा विशेष विधि के चुनाव में सहायता मिल सकती है।

4. आलोचनात्मक अनुसन्धान- इस अनुसन्धान के अन्तर्गत किसी सिद्धान्त से निर्गत प्राक्कल्पनाओं का निरीक्षण करते हैं। पूर्वधारणा के अनुसार हमारा विश्वास होता है कि यह अनुसन्धान इस बात की पुष्टि के लिए होता है कि क्या प्राप्त निष्कर्ष सैद्धान्तिक आशाओं के अनुरूप हैयहाँ अनुसन्धान का एक सामान्य वर्गीकरण प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। वर्गीकरण अन्य प्रकार से भी किया जा सकता है। पर सभी वर्गीकरणों में एक-दूसरे के तत्व किसी-न-किसी सीमा तक अवश्य विद्यमान होंगे।

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