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योग चिकित्सा का अर्थ | योग चिकित्सा क्या है | Yoga Therapy In Hindi | यौगिक चिकित्सा

योग चिकित्सा क्या है

उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति मनुष्य की अमूल्य निधि है जिसके आधार पर मनुष्य जीवन के सभी उद्देश्यों को परिपूर्ण करने के लिए कुछ न कुछ कर्म करता ही रहता है। सांसारिक मनुष्य सदैव सुख की कामना करता है तथा सुख की प्राप्ति के बिना समग्र स्वास्थ्य की प्राप्ति संभव नहीं है। यहाँ हम योग चिकित्सा को जानने वाले हैं लेकिन उससे पूर्व हमें योग का तात्पर्य जानना आवश्यक है। योग का पारमार्थिक लाभ देखा जाय तो यह परमात्मा के साथ एक होने की अच्छी कला है, लेकिन योग के व्यावहारिक लाभ को भी देखा जाय तो यह शारीरिक एवं मानसिक रोगों को दूर करने के लिए एक उत्तम चिकित्सा पद्धति है।

आज प्रत्येक मनुष्य अपने स्वास्थ्य एवं दीर्घ जीवन के लिए सतत् प्रयत्नशील है। स्वस्थ जीवन के रहस्य को जानने का उपाय ही चिकित्सा विज्ञान है। भौतिकवादी दृष्टिकोण ने मनुष्य मात्र को प्रकृति एवं प्राकृतिक जीवन शैली से दूर कर दिया है। वर्तमान समय में मनुष्य अनेकानेक रोग व कष्टों से ग्रस्त होता जा रहा है, जिसमें से अधिकाँश का कारण तनाव ही है। इन तनावजन्य व्याधियों में हृदय रोग, मस्तिष्क रोगमधुमेह, पेट एवं नाडी के रोग महत्वपूर्ण हैं।

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अत्यधिक कार्य, अप्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन, पर्यावरणीय प्रदूषण व मानसिक उद्वेग के कारण ही व्याधियाँ त्वरित गति से बढ़ रही हैं। कैंसर, हृदयरोग, एड्स, क्षयरोग, मधुमेह का प्रतिशत हमारे देश सहित सम्पूर्ण विश्व में बढ़ा है। इन रोगों का सम्पूर्ण उपचार बिना जीवन शैली बदलाव के आधुनिक चिकित्सा शास्त्र द्वारा सम्भव नहीं है।

योग चिकित्सा का अर्थ

यौगिक चिकित्सा आयुर्वेद के अनुसार- 'या क्रियाव्याधिहरणी सा चिकित्सा निगद्यते' अर्थात् विभिन्न क्रियायें, संसाधन व उपाय जिनसे रोग का निराकरण होता है उन्हें ‘चिकित्सा' की संज्ञा दी जाती है। यौगिक चिकित्सा से तात्पर्य योग विज्ञान अर्थात् यौगिक क्रियाओं द्वारा रोग निवारण करना ही 'योग चिकित्सा' कहलाती है। आसन, प्राणायाम आदि समस्त यौगिक प्रक्रियाओं का उपयोग कर विभिन्न रोगों की चिकित्सा करना ही यौगिक चिकित्सा का उद्देश्य है। इन समस्त प्रक्रियाओं का शरीर की सूक्ष्म से स्थूल क्रियाओं पर विशिष्ट प्रभाव पड़ता है।

सामान्य शब्दों में कहा जाय तो यौगिक संसाधनों का वह समूह (यम, नियम, षट्कर्म, आसन, प्राणायाम, ध्यान आदि) जिससे व्याधि की अवस्था से रोगी को स्वस्थ अवस्था में लाने हेतु सतत् प्रयास किया जाता है, वह यौगिक चिकित्सा अर्थात् योग चिकित्सा कहलाती है।

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प्राचीन ग्रन्थों में रोगोपचार की विभिन्न विधायें वर्णित हैं। आधिभौतिकआधिदैविक एवं आध्यात्मिक रोगों की चिकित्सा औषधतंत्र व मंत्र एवं योग के द्वारा करने का निर्देश किया गया है। आज सम्पूर्ण विश्व योग एवं उसके चिकित्सकीय उपयोग के विषय में जानने के इच्छुक हैं। खास करके कोरोना काल आने के पश्चात् आयुर्वेद एवं योग का प्रचार प्रसार सम्पूर्ण विश्व में त्वरित गति से हो रहा है। आयुर्वेद शास्त्र के अनुरुप ही यौगिक चिकित्सा का उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा एवं रोगी व्यक्ति के रोग की निवृत्ति है।

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